Wednesday, November 8, 2017

पवित्र नदियाँ गँगा जमुना सरस्वती के बारे मे आपने सुना होगा. मगर देखा केवल गँगा जमुना को ही. इस स्थान पे आकर सरस्वती नदी गुप्तगामिनि हो जाती है. ये जगह उत्तराखंड मे बद्रीनाथ के भी आगे भीमपुर के माणा गाँव के पास है. यहीं पर व्यास जी ने महाभारत लिखी थी मगर सरस्वती नदी के बहाव के शोर मे गणेश जी उनको नही सुन पा रहे थे. इसलिये व्यास जी ने उसे श्राप दिया और वो धरती के अंदर लुप्त हो गई.

मजे की वात ये है की यहाँ पे आप सरस्वती नदी को लुप्त होते हुऐ देख भी सकते हो.
आप भी देखो और अपनी अगली पीढियों को भी दिखाओ.

Monday, October 23, 2017

एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर "तेजो महालय"
बी.बी.सी. कहता है ...ताजमहल ....एक छुपा हुआ सत्य ....कभी मत कहो कि...यह एक मकबरा है...

ताजमहल का आकाशीय दृश्य......
आतंरिक पानी का कुंवा............
ताजमहल और गुम्बद के सामने का दृश्य
गुम्बद और शिखर के पास का दृश्य.....
शिखर के ठीक पास का दृश्य.........
आँगन में शिखर के छायाचित्र कि बनावट.....
प्रवेश द्वार पर बने लाल कमल........
ताज के पिछले हिस्से का दृश्य और बाइस कमरों का समूह........
पीछे की खिड़कियाँ और बंद दरवाजों का दृश्य........
विशेषतः वैदिक शैली मे निर्मित गलियारा.....
मकबरे के पास संगीतालय........एक विरोधाभास.........
ऊपरी तल पर स्थित एक बंद कमरा.........
निचले तल पर स्थित संगमरमरी कमरों का समूह.........
दीवारों पर बने हुए फूल......जिनमे छुपा हुआ है ओम् ( ॐ ) ....
निचले तल पर जाने के लिए सीढियां........
कमरों के मध्य 300 फीट लंबा गलियारा..
निचले तल के 22 गुप्त कमरों मे से एक कमरा..
२२ गुप्त कमरों में से एक कमरे का आतंरिक दृश्य.......
अन्य बंद कमरों में से एक आतंरिक दृश्य..
एक बंद कमरे की वैदिक शैली में निर्मित छत......
ईंटों से बंद किया गया विशाल रोशनदान .....
दरवाजों में लगी गुप्त दीवार,जिससे अन्य कमरों का सम्पर्क था.....
बहुत से साक्ष्यों को छुपाने के लिए, गुप्त ईंटों से बंद किया गया दरवाजा......
बुरहानपुर मध्य प्रदेश मे स्थित महल जहाँ मुमताज-उल-ज़मानी कि मृत्यु हुई थी.......
बादशाह नामा के अनुसार इस स्थान पर मुमताज को दफनाया गया.........

अब कृपया इसे पढ़ें .........

प्रो.पी. एन. ओक को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........
"ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था"
प्रो.ओक अपनी पुस्तक "TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस बात में विश्वास रखते हैं कि,--

सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था.....
प्रो.ओक कहते हैं कि...... ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर, एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था.
अपने अनुसंधान के दौरान प्रो.ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था.

=>शाहजहाँ के दरबारी लेखक "मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी " ने अपने "बादशाहनामा" में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है,,जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके 6 माह बाद, तारीख़15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए, आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया, लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे, पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे.

इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा जयसिंह को दिए गए थे.......

=>यह सभी जानते हैं कि मुस्लिम शासकों के समय प्रायः मृत दरबारियों और राजघरानों के लोगों को दफनाने के लिए, छीनकर कब्जे में लिए गए मंदिरों और भवनों का प्रयोग किया जाता था ,

उदाहरनार्थ हुमायूँ, अकबर, एतमाउददौला और सफदर जंग ऐसे ही भवनों मे दफनाये गए हैं ....

=>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है---------
"महल" शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता...
यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है---------
पहला -----शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ...
और दूसरा-----किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए यह समझ से परे है...

प्रो.ओक दावा करते हैं कि, ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि--

मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी, चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है क्योंकि शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि नही करता है.....

इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं...... तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था---

==> न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है...

==> मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था......

==> यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन्1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया,,परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया,जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था......

==> फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था और लगभग दस साल यहाँ रहा, के लिखित विवरण से पता चलता है कि, औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था.......

प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि, ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है.......

आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं,जो आम जनता की पहुँच से परे हैं
प्रो. ओक. जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं.

==> ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है,, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता,जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है, फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब....????

राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं....

प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे ....

ज़रा सोचिये....!!!!!!

प्रो. पी. एन. ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत, शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, "तेजो महालय" को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों ?????

तथा......

इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों ???? ???

आंसू टपक रहे हैं, हवेली के बाम से,
रूहें लिपट के रोती हैं हर खासों आम से,
अपनों ने बुना था हमें, कुदरत के काम से,
फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं हम गैरों के नाम से.

Tuesday, October 17, 2017

सफल लोगो की अच्छी आदते

यदि आप भी जीवन में ज्यादा सफल लोगो की तरह प्रदर्शन करना चाहते हो तो काम करते समय इन आदतो को जरूर अपनाइये.

यदि आप ये चाहते हो की आपको कम से कम काम करके ही सफलता मिले, तो आप अपने आप को ही बेवकूफ बना रहे हो. क्योकि सफल लोग कठिन महेनत करते है, रोज़ बहुत सी चीजो का त्याग करते है, कई बार असफल होते है, लेकिन फिर भी हमेशा आगे बढकर वे अपने लक्ष्य को पाते है. जब आप गंभीर रूप से एक सफल बनने के बारे में सोचते हो, तो सबसे पहले आपको अपनी आदतो को बदलने की जरुरत होती है, एक सफल इंसान बनने के लिये आपको उनके जैसी आदतो को भी स्वीकार करना चाहिये और अपने आप को विकसित करना चाहिये. एक सफल इंसान बनने के लिए आपको आपके स्वभाव के विपरीत जाने की जरुरत होती है, तभी आपको ये आदते आगे बढने में मददगार साबित होंगी.

क्या आप उदार चरीत्र के हो ?

सफल इंसान उदार ही होते है और उनमे अपने और अपनी टीम में होने वाले बदलाव को देखने की चाह होती है. जब उन्हें अपने लक्ष्य को हासिल करने का कोई और अच्छा मार्ग मिलता है तो वे उन रास्तों पर चलने से कतई नही डरते. और नये रास्तो पर चलते हुए नए विचार निर्माण करते जाते है, और दुसरो को उन रास्तो पर चलने के लिए प्रेरीत करते है. श्रेष्ट और सफल इंसान एक महान नेता भी होते है, क्योकि वे अपने साथ अपनी पुरी टीम को भी लेकर चलते है.

क्या आप सही प्रश्न पुछते हो ?

सफल इंसान हमेशा ही कुछ अलग करते है और ऐसा करने का उनके पास सबसे अच्छा रास्ता यही होता है की वे सही प्रश्न पूछे. क्योकि लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग पर चलते समय कई प्रश्न आपके दिमाग में उपस्थित होते है, और उनका समाधान आपको तभी मिलेंगा जब आप सही प्रश्न पूँछोंग. क्योकि इसी से आपको पता चल सकता है की आप कहा जा रहे हो, और कैसे और ज्यादा अपने आप में बदलाव ला सकते हो. सफल इंसान हमेशा ही नये-नये विचारो और उपयो के साथ आते है ताकि उन्हें उनका ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके.

क्या आप हर समय अपना 100% देते हो ?

सफल इंसान ये जानते है की उन्हें हमेशा अपना 100% देना है और वह कब देना है ये भी वही जानते है. उन्होंने जितने भी लक्ष्यों को हासिल किया है उन सभी की जानकारी वे आपको प्रदान करते है. ऐसे लोग हमेशा ही उन रास्तो की खोज में लगे रहते है जिन रास्तो पर चलकर वे अपने प्रदर्शन की क्षमता को बढ़ा सके. ताकि प्रतियोगिता की इस दुनिया में वे आगे बढ़ सके.

क्या आप समस्या का समाधान करने में दुसरो को भी शामिल करते हो ?

सफल इंसान वे कहलाते है जिनके पास मुसीबतो का सामना करने के श्रेष्ट उपाय होते है, ताकि वे दुसरो की भी सहायता कर सके और इनका श्रेय वे खुद नही लेते बल्कि दुसरो को भी देते है. वे अपने कामो पर तो पुरा ध्यान देते ही है लेकीन साथ ही दुसरो को विकसित करने में भी लगे रहते है. ऐसे लोगो के लिये अपने साथ-साथ अपने सहकर्मियों का विकास भी जरुरी होता है.

क्या आपके पास लक्ष्य है?

सफलता प्राप्त करने वाले इंसान बेसुध होकर दिनभर काम करते है, लेकिन हर काम करने का उनका एक उद्देश्य होता है. उनका मुख्य उद्देश्य व्यापर करना होता है. वे हमेशा परीणाम देखना चाहते है और वे अपना काम भी परीणाम मिलने की चाह से करते है ना की काम में व्यस्त रहने की चाह से.

क्या आपने कोई पहलकदमी की ?

सफल इंसानों में मुश्किलो को स्वीकारने की चाह होती है, मुश्किलो का वे आसानी से सामना करते है और उनके कुछ सीखकर ही आगे बढ़ते है. वे खुद ही अपनेआप को प्रेरीत करते है और खुद ही अवसरों का निर्माण करते है और हमेशा नये अवसरों की खोज में लगे रहते है. शुरू से ही उनमे कुछ नया, कुछ अलग करने की चाह होती है. वे अच्छी तरह से अपनी जवाबदरीयो को समझकर उन्हें बखुबी निभाते है. और अपने करियर में आगे बढ़ने के लिये यह उन्हें काफी मददगार साबित होता है.

क्या आप अपनी ताकतों पर ध्यान केंद्रित करते हो ?

श्रेष्ठ एवं सफल लोग अपनी ताकतों पर ज्यादा ध्यान देते है और साथ दूसरे लोगो की ताकतों पर भी ध्यान रखते है. उनका ध्यान इस बात पर सबसे ज्यादा होता है की वे क्या कर सकते है जबकि इस बात पर बहुत कम होता है की वे क्या नही कर सकते है. वे असफलता को अपनी सफलता के रास्ते की बाधा नही बनने देते, लेकिन असफलता से कुछ ना कुछ जरूर सीखते है. सफल इंसान अपना ज्यादातर समय अपनी कमजोरियों पर व्यतीत नही करते, बल्कि वे ज्यादातर समय अपने प्रदर्शन को विकसित करने में लगाते है.

क्या आपने कभी अपनी जिम्मेदारीया ली है ?

सफलता प्राप्त कर चुके लोग ये जानते है की समय का उनके जीवन में बहुत महत्त्व है, इसीलिए उन्हें जरा भी समय व्यर्थ गवाना पसंद नही होता है. जब कभी भी उन्हें उनके द्वारा की गई गलती का अहसास होता है तो वे तुरंत उसकी जिम्मेदारी लेते हुए अपनी गलती को सुधारने की कोशिश करने लगते है. वे सिर्फ अपनी जिम्मेदारिया ही साथ लेके नही चलते बल्कि दुसरो की जिम्मेदारियो को भी समझते है.

क्या आप कभी अपने क्षेत्र से बाहर गए है ?

अपने क्षेत्र से बाहर जाना, ये भी सफल लोगो की पहचान होती है. जब भी उन्हें किसी समस्या के समाधान करने की जरुरत होती है तो वे नए उपयो के साथ आते है, हमेशा उनके क्षेत्र के बाहर वे 2-3 ऐसे लोगो को रखते है जिनपर उन्हें पूरा भरोसा हो. उन्ही के साथ वे अपने क्षेत्र से बाहर जाते है, महत्वपूर्ण जानकारीयो को हासिल करते है और अपनी संस्था को आगे बढ़ाने में सहायता करते है. इसी वजह से ज्यादा से ज्यादा लोगो को वे आकर्षित करते चले जाते है और मजबुत रीश्तो का निर्माण करती है.

आप अग्रसक्रिय हो या प्रतिक्रियात्मक हो ?

सफलता प्राप्त करने वाले इंसान अपने काम और समय को लेकर अग्रसक्रिय होते है. उनका हर दिन क्या जरुरी और महत्वपूर्ण है उसे करने से शुरू होता है. वे कभी भी मुश्किलो को अपने लक्ष्य के रास्ते की बाधा नही बनने देते. और इसी तरह वे प्रतिक्रियात्मक भी बन सकते है.

क्या आपने कभी खुद को पहले या दुसरे स्थान पर रखा है ?

ऐसे लोग खुद को दुसरे स्थान पर रखने की बजाये पहले स्थान पर रखते थे. क्योकि वे हमेशा ही जानते थे की ऐसा करने से उचे पद पर रहते हुए वे लोगो की सहायता कर सकते है. साथ ही जितने भी लोग उनके साथ काम करते है, उन सभी की भी समस्याओ का समाधान ऐसे लोग करते है.

हमेंशा ये अपने mind में रखे:-

दुनिया में हर एक की सफलता अलग है. जिसका सबसे मुख्य रूप एक सफल इंसान बनना है. ऐसे लोग अपने जीवन में आनंद और खुशियो को बढाने की कोशिश करते है. और इन सभी आदतो को अपनाकर ही आप अपने जीवन को बदल सकते हो. यदि आपको अपने लक्ष्य तक पहोचना है तो आपको बदले में कुछ न कुछ तो जरूर देना ही पडेंगा.

Saturday, October 14, 2017

कर्नाटक के एक शहर सिरसी में शलमाला नाम की नदी बहती है। ये अपने आप में एक खास नदी है क्योंकि इस नदी में एक साथ हजारों शिवलिंग बने हुए हैं। ये सभी शिवलिंग नदी की चट्टानों पर बने हुए हैं। यहां की चट्टानों में शिवलिंगो के साथ-साथ नंदी, सांप आदी भगवान शिव के प्रियजनों की भी आकृतियां भी बनी हुई हैं। हजारों शिवलिंग एक साथ होने की वजह से इस स्थान का नाम सहस्त्रलिंग पड़ा

बताया जाता है कि 16वीं सदी में सदाशिवाराय नाम के एक राजा थे। जो भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे। शिव भक्ति में डूबे रहने की वजह से वे भगवान शिव की अद्भुत रचना का निर्माण करवाना चाहते थे। इसलिए राजा सदाशिवाराय ने शलमाला नदी के बीच में भगवान शिव और उनके प्रियजनों की हजारों आकृतियां बनवा दीं। नदी के बीच में स्थित होने की वजह से सभी शिवलिंगों का अभिषेक और कोई नहीं बल्कि खुद शलमाला नदी के द्वारा किया जाता है।

वैसे तो इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए यहां हजारों भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन शिवरात्रि या फिर श्रावण के सोमवार पर यहां भक्त विशेष रूप आते हैं। यहां पर आकर भक्त एक साथ हजारों शिवलिंग के दर्शन और अभिषेक का लाभ उठाते हैं। वैसे तो भगवान शिव की महिमा को सभी जानते है लेकिन आज जो नजारा हम आपको दिखाने जा रहे हैं उसे देखने के बाद आपका भी विश्‍वास भोले भंडारी पर अटूट हो जाएगा।
जय भोलेनाथ कि
☘🍁🌾☘🍁🌾☘🍁🌾☘🍁
              *मिलो किसी से ऐसे कि*
                 *ज़िन्दगी भर की*
                *पहचान बन जाये,*
          *पड़े कदम जमीं पर ऐसे कि*
                 *लोगों के दिल पर*
                 *निशान बन जाये..*
              *जीने को तो ज़िन्दगी*
            *यहां हर कोई जी लेता है,*
                      *लेकिन.....*
             *जीयो ज़िन्दगी ऐसे कि*
            *औरों के लब की मुस्कान*
                    *बन जाये ...🖊*          
ऑफिस से निकल कर शर्माजी ने

स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया,
.
पत्नी ने कहा था 1 दर्ज़न केले लेते आना।
.
तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा केले बेचते हुए

एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी।
.
वैसे तो वह फल हमेशा "राम आसरे फ्रूट भण्डार" से

ही लेते थे,
पर आज उन्हें लगा कि क्यों न

बुढ़िया से ही खरीद लूँ ?
.
उन्होंने बुढ़िया से पूछा, "माई, केले कैसे दिए"
.
बुढ़िया बोली, बाबूजी 20 रूपये दर्जन,

शर्माजी बोले, माई 15 रूपये दूंगा।
.
बुढ़िया ने कहा, 18 रूपये दे देना,

दो पैसे मै भी कमा लूंगी।
.
शर्मा जी बोले, 15 रूपये लेने हैं तो बोल,

बुझे चेहरे से बुढ़िया ने,"न" मे गर्दन हिला दी।
.
शर्माजी बिना कुछ कहे चल पड़े

और राम आसरे फ्रूट भण्डार पर आकर

केले का भाव पूछा तो वह बोला 28 रूपये दर्जन हैं
.
बाबूजी, कितने दर्जन दूँ ?

शर्माजी बोले, 5 साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ, 

ठीक भाव लगाओ।
.
तो उसने सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया।

बोर्ड पर लिखा था- "मोल भाव करने वाले माफ़ करें"

शर्माजी को उसका यह व्यवहार बहुत बुरा लगा,

उन्होंने कुछ  सोचकर स्कूटर को वापस

ऑफिस की ओर मोड़ दिया।
.
सोचते सोचते वह बुढ़िया के पास पहुँच गए।

बुढ़िया ने उन्हें पहचान लिया और बोली,
.
"बाबूजी केले दे दूँ, पर भाव 18 रूपये से कम नही लगाउंगी।

शर्माजी ने मुस्कराकर कहा,

माई एक  नही दो दर्जन दे दो और भाव की चिंता मत करो।
.
बुढ़िया का चेहरा ख़ुशी से दमकने लगा।

केले देते हुए बोली। बाबूजी मेरे पास थैली नही है ।

फिर बोली, एक टाइम था जब मेरा आदमी जिन्दा था
.
तो मेरी भी छोटी सी दुकान थी।

सब्ज़ी, फल सब बिकता था उस पर।

आदमी की बीमारी मे दुकान चली गयी,

आदमी भी नही रहा। अब खाने के भी लाले पड़े हैं।

किसी तरह पेट पाल रही हूँ। कोई औलाद भी नही है
.
जिसकी ओर मदद के लिए देखूं।

इतना कहते कहते बुढ़िया रुआंसी हो गयी,

और उसकी आंखों मे आंसू आ गए ।
.
शर्माजी ने 50 रूपये का नोट बुढ़िया को दिया तो

वो बोली "बाबूजी मेरे पास छुट्टे नही हैं।
.
शर्माजी बोले "माई चिंता मत करो, रख लो,

अब मै तुमसे ही फल खरीदूंगा,
और कल मै तुम्हें 500 रूपये दूंगा।

धीरे धीरे चुका देना और परसों से बेचने के लिए

मंडी से दूसरे फल भी ले आना।
.
बुढ़िया कुछ कह पाती उसके पहले ही

शर्माजी घर की ओर रवाना हो गए।

घर पहुंचकर उन्होंने पत्नी से कहा,

न जाने क्यों हम हमेशा मुश्किल से

पेट पालने वाले, थड़ी लगा कर सामान बेचने वालों से

मोल भाव करते हैं किन्तु बड़ी दुकानों पर

मुंह मांगे पैसे दे आते हैं।
.
शायद हमारी मानसिकता ही बिगड़ गयी है।

गुणवत्ता के स्थान पर हम चकाचौंध पर

अधिक ध्यान देने लगे हैं।
.
अगले दिन शर्माजी ने बुढ़िया को 500 रूपये देते हुए कहा,

"माई लौटाने की चिंता मत करना।

जो फल खरीदूंगा, उनकी कीमत से ही चुक जाएंगे।

जब शर्माजी ने ऑफिस मे ये किस्सा बताया तो

सबने बुढ़िया से ही फल खरीदना प्रारम्भ कर दिया।

तीन महीने बाद ऑफिस के लोगों ने स्टाफ क्लब की ओर से

बुढ़िया को एक हाथ ठेला भेंट कर दिया।

बुढ़िया अब बहुत खुश है।

उचित खान पान के कारण उसका स्वास्थ्य भी

पहले से बहुत अच्छा है ।

हर दिन शर्माजी और ऑफिस के

दूसरे लोगों को दुआ देती नही थकती।
.
शर्माजी के मन में भी अपनी बदली सोच और

एक असहाय निर्बल महिला की सहायता करने की संतुष्टि का भाव रहता है..!

जीवन मे किसी बेसहारा की मदद करके देखो यारों,

अपनी पूरी जिंदगी मे किये गए सभी कार्यों से

ज्यादा संतोष मिलेगा
सोच को बदलो जिंदगी जीने का नजरिया बदल जायेगा।

 त्यौहारों की खरीदी_
_ऐसी जगह से करें_

_जो आपकी खरीदी की वजह से_
_त्यौहार मना सके ❜_🙏